जब तुम मेरे आसपास नहीं होते हो तो कभी कभी तुम्हारी खुश्बू सांसों में आ जाती है और लगता है कि तुम यहीं कहीं हो.एक आंसू आंखों से निकलकर गाल पर लुढ़कता है और तुम्हारी गर्माहट का एहसास कराता है.कोई हवा का झोंका पास से गुज़रता है तो ऐसा लगता है मानों तुमने मेरा नाम पुकारा है.फिर पलट कर देखता हूं तो कोई नहीं होता कोई भी नहीं.पूरे घर में सन्नाटा भांय भांय कर रहा होता है.ना जाने फिर किस सोच में डूब जाता हूं.तुम्हारी तस्वीर देखकर मैं क्या सोचता हूं ये मुझे खुद ही याद नहीं रहता.क्योंकि इतना कुछ सोच जाता हूं की शायद वो याद्दाश्त से बाहर हो जाता है.तुम्हें पहली बार जब देखा था.तुम जब पहली बार मुस्कुराये.जब तुम मेरे दिल के इतने करीब आए.और तब से लेकर आज का दिन तुम्हारी तस्वीर देखते ही बहुत तेज़ी से मेरी आंखों के सामने से गुज़र जाता है.चाहता हूं की उस वक्त उन तेजी से भाग रहे पलों में से किसी एक को दबोच लूं और उसमें एक बार फिर से जी लूं.पर शायद यहां बैठकर तुम्हारा इंतेज़ार करना उन बीते लम्हों से ज्यादा अच्छा है...है ना
बस गदहा मत बनना...
8 years ago
kya bhai tum to ekdum shayarana ho gaye ho ....too good bahut accha lijhte ho yaar...
ReplyDeletegood, keep it up.
Hm.... that's mazing I never knew you are such a nice writer keep it up
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